Monday, 4 March 2019

Rich dad poor Dad



रॉबर्ट कियोसाकी जोकि इस किताब के लेखक है, उनके दो पिता थे. उनके एक पिता जो पढ़े-लिखे, पी.एच.डी होल्डर थे मगर जिंदगी भर गरीब ही रहे और गरीबी में ही मरे. इसलिए रॉबर्ट उन्हें Poor डैड कहते थे. वहीँ उनके दुसरे पिता बहुत पढ़े लिखे तो नहीं थे मगर काफी अमीर थे. उन्हें रॉबर्ट Rich डैड बुलाते थे. अब ये सोचने की बात है कि किसी भी इंसान के एक ही वक्त में दो पिता कैसे हो सकते है.
उनके गरीब पिता का बस एक ही सपना था कि रॉबर्ट खूब मेहनत से पढ़ाई करने के बाद किसी बड़ी सी कंपनी में नौकरी करके अपना भविष्य सुरक्षित कर ले. मगर रॉबर्ट के दुसरे पिता जो अमीर थे, वे दरअसल रॉबर्ट के दोस्त माइक के पिता थे. वे चाहते थे कि रॉबर्ट अपनी जिंदगी में कुछ चेलेन्ज ले. क्योंकि सारे सबक सिर्फ स्कूल में ही नहीं सीखे जाते. कुछ सबक ऐसे होते है जिन्हें इंसान अपनी जिंदगी के तजुरबो से ही सीखता है. स्कूली पढ़ाई सिर्फ अच्छे ग्रेड्स दिला सकती है मगर जिंदगी की पढ़ाई बहुत कुछ सिखाती है. बेशक पढ़ाई-लिखाई की अपनी अहमियत है मगर सिर्फ इसके भरोसे बैठकर ही सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता.


उनके गरीब पिता का बस एक ही सपना था कि रॉबर्ट खूब मेहनत से पढ़ाई करने के बाद किसी बड़ी सी कंपनी में नौकरी करके अपना भविष्य सुरक्षित कर ले. मगर रॉबर्ट के दुसरे पिता जो अमीर थे, वे दरअसल रॉबर्ट के दोस्त माइक के पिता थे. वे चाहते थे कि रॉबर्ट अपनी जिंदगी में कुछ चेलेन्ज ले. क्योंकि सारे सबक सिर्फ स्कूल में ही नहीं सीखे जाते. कुछ सबक ऐसे होते है जिन्हें इंसान अपनी जिंदगी के तजुरबो से ही सीखता है. स्कूली पढ़ाई सिर्फ अच्छे ग्रेड्स दिला सकती है मगर जिंदगी की पढ़ाई बहुत कुछ सिखाती है. बेशक पढ़ाई-लिखाई की अपनी अहमियत है मगर सिर्फ इसके भरोसे बैठकर ही सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता.


Lesson 1अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते


एक बार एक आदमी था जिसके पास एक गधा था. जब भी उसे अपने गधे से कुछ मेहनत करवानी होती थी तो वे एक गाजर को उसके सामने लटका देता था. उस गाज़र को देखते ही गधा उसे खाने के लालच में काम करता चला जाता था. उसे उम्मीद थी कि एक दिन वो उस गाज़र tak पहुँच ही जाएगा. अब ये उस आदमी के लिए तो एक अच्छी तरकीब बन गयी मगर बेचारे गधे को कभी भी वो गाज़र नहीं मिल पायी. क्यों? इसलिए कि वो गाज़र बस एक छलावा है. बहुत से लोग ठीक उस गधे की तरह ही होते है. वे मेहनत पर मेहनत किये चले जाते है, इस उम्मीद में कि एक दिन वे अमीर बन जायेंगे. मगर पैसा उनके लिए महज़ एक सपना बन के रह जाता है. इस sapne ke piche भागने से आप उस तक कभी नहीं पहुँच सकते. तो पैसे के लिए काम करने के बजाये पैसे को अपने लिए काम करने दे.


जब आप अमीर बनना चाहते है तो सिर्फ पैसे कमाने के लिए काम ना करे. क्योंकि जैसे ही हम अमीर बनने की राह में कदम बढ़ाते है, हमारा डर और लालच हम पर हावी होने लगता है कि कहीं हम गरीब के गरीब ही ना रह जाये. इसी डर से हम और ज्यादा मेहनत करने में जुट जाते है. फिर हमारा लालच हम पर हावी होने लगता है. हम उन सारी खूबसूरत चीजों की कल्पना करने लगते है जो पैसे से हासिल की जा सकती है. अब यही डर और लालच हमें ऐसे चक्कर में उलझा देता है जो कभी ख़त्म नहीं होता. तो हम अब और मेहनत करते है कि और ज्यादा कमा सके और फिर हमारा खर्च भी उसी हिसाब से बढ़ने लगता है. इसको ही अमीर डेड “RAT RACE” कहते है. अब इसका नतीजा ये हुआ कि हम पैसे कमाने के लिए हद से ज्यादा मेहनत करते है, खर्च करते है. ये एक ट्रेप है. और आपको लालच और डर का ये ट्रेप अवॉयड करना है. क्योंकि हममें से अधिकतर लोग जो अमीर होना चाहते है, इसी ट्रेप का शिकार हो जाते है. पैसे के पीछे मत भागिए बल्कि पैसे को अपने पीछे भागने के लिए मजबूर कर दीजिए. आपकी नौकरी लगी है तो काम पर ये सोच कर मत जाईये कि हर महीने आपको एक पे-चेक lena hai. क्योंकि वो पे-चेक आपके सारे बिल्स मुश्किल से ही भर पाता है. ये हर महीने की कहानी बन जाती है. फिर तंग आकर आप कोई दूसरी नौकरी ढूंढकर और ज्यादा मेहनत करने लगते है. लेकिन तब भी आप पैसे के लिए ही काम कर रहे होते है. और यही वजह है कि आप कभी अमीर नहीं बन पाते.


सच का सामना कीजिये. आप खुद के लिए जवाबदेह है दुसरो के लिए नहीं. तो आपके जो भी सवाल है, खुद से पूछिए क्योंकि उनका जवाब सिर्फ आपके ही पास है. क्या आप सिर्फ इसलिए काम कर रहे है कि आपकी जिंदगी में सिक्योरिटी रहे ? एक ऐसी नौकरी जहाँ से आपको निकाले जाने का कोई डर न हो ? या फिर आप सिर्फ दो पैसे कमाने के लिए काम करते है ? और आपको लगता है कि एक दिन आप इस तरह अमीर हो जायेंगे. क्या बस यही आपको सेटीस फाई करने के लिए काफी है ? अगर आपका जवाब हां है तो मुझे आपकी सोच पर अफ़सोस है क्योंकि आपने जो अमीर बनने का सपना देखा है वो कभी पूरा नहीं होने वाला. आप हमेशा गरीबी में ही जियेंगे. लेकिन अगर आपका जवाब “ना” है तो आपका पहला कदम ये होगा कि सबसे पहले आप अपने मन से डर हटा दीजिये. क्योंकि ज्यादा पैसा ना कमा पाने का डर और लालच ही आपको बगैर सोचे-समझे काम करने के लिए मजबूर करता है. और हमारा यही कदम हमें नाकामयाबी की तरफ धकेलता है. बेशक हम सब के अन्दर डर और चाहत की भावना होती है लेकिन उन्हें खुद पर इतना हावी ना होने दे कि हम उनके बस में होकर उलटे-सीधे फैसले लेने लग जाए. बेहतर होगा कि हम जो भी करे पहले उसके बारे में खूब सोच ले. हमेशा दिल से नहीं बल्कि दिमाग से काम ले.


हर सुबह अपने आप से पूछिए क्या आप उतना कर पा रहे है जितना कि आपको करना चाहिए? क्या आप अपनी पोटेंशियल का पूरा इस्तेमाल कर पा रहे है ? आम लोगो की तरह सोचना छोड़ दीजिये जो काम सिर्फ और सिर्फ पैसे के लिए करते है. ये सोचना छोड़ दीजिये कि “ मेरा बॉस कम पैसा देता है, मुझे ज्यादा मिलना चाहिए, मै इससे ज्यादा कमा सकता हूँ”. याद रखिये, आपकी परेशानियों के लिए सिर्फ आप जिम्मेदार है, कोई और नहीं. बॉस आपकी सेलेरी NAHI बडाता तो उसे इल्जाम मत दीजिये, टैक्स को इल्जाम मत दीजिये. जब आप खुद की समस्याओं की जिम्मेदारी लेते है तब सिर्फ आप ही उसका हल निकाल सकते है. यही वो पहला सबक है जो अमीर डेड ने रॉबर्ट को सिखाया.



इस सबक का एक पार्ट ये भी था कि अमीर डेड ने उन्हें एक कंवीनीयेंस स्टोर में काम पर लगा दिया. उन्हें इस काम के कोई पैसे नहीं मिले. वे बस काम करते रहे. इसका फायदा ये हुआ कि वे अपने दिल से काम में लगे रहे और इस दौरान कई नये आइडिया उनके दिमाग में आते रहे. पैसे को अपने पीछे कैसे भगाया जाए इस बारे में उन्हें कई विचार मिले. उन्होंने देखा कि उस स्टोर की क्लर्क कोमिक्स बुक के फ्रंट पेज को दो हिस्सों में फाड़ देती थी. आधा हिस्सा वो रख लेती और आधा हिस्सा फेंक देती थी. देर शाम स्टोर में एक डिस्ट्रीब्युटर आया करता था. वो कोमिक्स बुक के उपरी आधे हिस्से को क्रेडिट के लिए लेता और बदले में नयी कोमिक्स बुक्स दे जाया करता. एक दिन उन्होंने उस डिस्ट्रीब्युटर से पूछा कि क्या वो पुरानी कोमिक्स बुक्स ले सकते है. वो इस शर्त पर मान गया कि वे उन कोमिक्स को बेचेंगे नहीं. ये उनके दिमाग में बिजनेस का एक नया आइडिया था. उन्होंने वे पुरानी कोमिकबुक्स अपने दोस्तों और बाकी बच्चो को पढने के लिए किराए पर देनी शुरू कर दी. बदले में वे हर किताब का 10 सेंट किराया वसूल करते थे. हर किताब सिर्फ दो घंटे के हिसाब से पढने के लिए दी जाती थी तो असल मायनों में वे उन्हें बेच नहीं रहे थे. उन्हें उस गेराज पर काम भी नहीं करना पड़ा जहाँ से वे कोमिक्स किराए पर देते थे. उन्होंने माइक की बहन को काम पर रखा जिसके लिए उसे हर हफ्ते 1 डॉलर दिया जाता. एक ही हफ्ते में उन्होंने 9.5 डॉलर कमाए. इस तरह उन्होंने सीखा कि पैसे को खुद के लिए काम करने दो ना कि आप पैसे के लिए काम करो.



सबक 2: फिनेंसियल लीटरेसी क्यों सिखाई जाए ?



1923 में एजवाटर बीच होटल, शिकागो में एक मीटिंग हुई. दुनिया के बहुत से लीडर और बेहद अमीर बिजनेसमेन इस मीटिंग का हिस्सा बने. इनमे से थे एक बहुत बड़ी स्टील कंपनी के मालिक चार्ल्स शवाब और समुअल इंसुल उस वक्त की लार्जेस्ट यूटीलिटी प्रेजिडेंट और बाकी कई और बड़े बिजनेसमेन. इस मीटिंग के 25 साल बाद इनमे से कई लोग गरीबी में मरे, कुछ ने ख़ुदकुशी कर ली थी और कईयों ने तो अपना दिमागी संतुलन खो दिया था.

असल बात तो ये है कि लोग पैसे कमाने में इतने मशगूल हो जाते है कि वो ये ख़ास बात सीखना भूल जाते है कि पैसे को रखा कैसे जाए. आप चाहे जितना मर्ज़ी पैसा कमा ले, उसे बनाये रखना असली बात है. और अगर ये हुनर आपने सीख लिया तो आप किसी भी आड़े-टेड़े हालात का सामना आसानी से कर लेंगे. लॉटरी में मिलियन जीतने वाले लोग कुछ सालो तक तो मज़े से जीते है मगर फिर वापस उसी पुरानी हालत में पहुँच जाते है. अधिकतर लोगो के सवाल होते है कि अमीर कैसे बने? या अमीर बनने के लिए क्या करे ? इन सवालो के ज़वाब से अधिकतर लोगो को निराशा ही होती है. मगर इसका सही ज़वाब होगा कि पहले आप फानेंसियेली लिट्रेट बनना सीखे. देखिये ! अगर आपको एम्पायर स्टेट बिल्डिंग खड़ी करनी है तो सबसे पहले आपको एक गहरा गड्डा खोदना पड़ेगा, फिर उसके लिए एक मज़बूत नींव रखनी पड़ेगी. लेकिन अगर आपको एक छोटा सा घर बनाना हो तो एक 6 इंची कोंक्रीट स्लेब डालकर भी आपका काम चल जाएगा. मगर अफ़सोस तो इसी बात का है कि हम में से ज़्यादातर लोग 6 इंची स्लेब पर एक एम्पायर स्टेट बिल्डिंग खड़ी करना चाहते है. और वे ऐसा करते भी है तो ज़ाहिर है कि बिल्डिंग टूटेगी ही टूटेगी.


गरीब डेड रॉबर्ट से बस यही चाहते थे कि वे खूब पढ़ाई करे, लेकिन अमीर डेड उसे फिनेंसियेली लिट्रेट बनना चाहते थे. ज्यादातर स्कूल सिस्टम बस घर बनाना सिखाते है, मज़बूत फाउंडेशन नहीं. स्कूली शिक्षा और पढ़ाई की अपनी अहमियत है मगर असल जिंदगी में ये ही सब कुछ नहीं है.


रुल नो.1: लाएबिलिटीज़ और एस्सेट्स के बीच फर्क समझे और एस्सेट्स खरीदे.


सुनने में बड़ी आसान बात लगती है. लेकिन यही Ek रुल है जो आपको अमीर बनाने में मदद करेगा. अक्सर गरीब और मिडल क्लास लोग लाएबिलिटज को एस्सेट समझ लेते है. मगर अमीर जानता है कि असल में एस्सेट्स होते क्या है और वो वही खरीदता है. अमीर डेड “KISS” प्रिंसिपल में यकीन रखते है जिसका मतलब है कीप इट सिंपल, स्टूपिड. उन्होंने लेखक और उसके दोस्त माइक को यही सिंपल बात सिखाई जिसकी बदौलत वे इतनी मज़बूत फाउंडेशन रखने में कामयाब रहे. इस सीख की यही सिंपल बात है ki लाएबिलिटीज़ और एस्सेट्स के बीच फर्क समझे और एस्सेट्स खरीदे ... Lekin अगर ये इतना ही सिंपल है तो हर आदमी अमीर होता. है ना? मगर यहाँ मामला उल्टा है. ये दरअसल इतना सिंपल है कि हर कोई इस बारे में सोचता तक नहीं है. लोगो को लगता है कि उन्हें लाएबिलिटीज़ और एस्सेट्स के बीच फर्क पता है मगर उन्हें सिर्फ लिट्रेसी के बारे में मालूम है फैनेंशियेल लिट्रेसी के बारे में नहीं.


इनकम स्टेटमेंट को “प्रॉफिट और लॉस” का स्टेटमेंट मानकर चलना चाहिए. इसका सिंपल सा मतलब है . Income hai कि आपके पास कितना पैसा आया और expense hai ki aapse कितना पैसा खर्च हुआ. बेलेंस शीट एस्सेट्स और लाएबिलिटीज़ के बीच बेलेंस बताती है. बहुत से पढ़े-लिखे एकाउंटेंट्स को भी ये पता नहीं होता कि आखिर बेलेंस शीट और इनकम स्टेटमेंट कैसे एक दुसरे से जुड़े है. 


अब ये चार्ट देखने में बहुत सिंपल है, इसे आसानी से लोगो को समझाया जा सकता है. एस्सेट्स वे चीज़े होती है जो आपके लिए पैसे कमाने का काम करती है. मान लो आप कोई घर खरीदकर उसे किराए पर देते है तो उसी किराए से आप वो लोन भी चूका सकते है जो आपने घर खरीदने के लिए लिया था. अब घर भी आपका हुआ और उससे मिलने वाला किराया भी. इसके उलट लाएबिलिटीज़ आपकी जेब से पैसे खर्च करवाती है. जैसे कि घर खरीदकर उसमे रहने से आपको कोई किराया नहीं मिलने वाला. तो अब आप समझ गए होंगे कि अगर अमीर बनना है तो एस्सेट्स खरीदिए और गरीब ही रहना है तो लाएबिलिटीज़.


अमीर लोगो के पास ज्यादा पैसा इसलिए होता है कि वे इस प्रिंसिपल पर यकीन करते है. वही दूसरी तरफ गरीब लोग इस प्रिंसिपल को ठीक से समझ ही नहीं पाते. इसीलिए इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि सिर्फ लिट्रेट नहीं बल्कि फिनेंशियेली लिट्रेट बनिए.
सिर्फ नंबर्स से कुछ नहीं होता, फर्क तो तब पड़ता है जब आप अपनी कहानी खुद लिखे. अधिकतर परिवारों में ये देखा गया है कि जो मेहनती होता है उसके पास पैसा भी ज्यादा होता है मगर उसका फायदा क्या जब सारा पैसा लाएबिलिटीज़ में ही खर्च हो जाए.


ये चार्ट दिखाता है कि मिडल क्लास आदमी अपना पैसा किस तरह खर्च करता है. और अगर यही उनका तरीका रहता है तो सारी जिंदगी वे मिडल क्लास ही बनकर रहते है. या क्या पता उससे भी नीचे चले जाए. क्योंकि आप देख सकते है कि उनका सारा पैसा लाएबिलिटीज़ में ही खर्च हो रहा है. कभी मोर्टेज, कभी रेंट, कार लोन, हाउस लोन, क्रेडिट कार्ड का बिल, फीस और भी ना जाने क्या-क्या. उनकी सारी कमाई इसीमे खर्च हो जाती है. 
दूसरी ओर गरीब लोग है जिनकी कोई लाएबिलिटी तो नहीं है मगर उनके कोई एस्सेट्स भी नही होते. वे भी पैसा कमाते है, सेलेरी पाते है मगर हर रोज़ के खर्चो में उनका सारा पैसा उड़ जाता है. माना एक गरीब आदमी हज़ार डॉलर कमाता है. उसमे से 300 डॉलर वो अपने छोटे से घर के किराए में खर्चता है, 200 डॉलर उसके आने-जाने का किराया, 200 डॉलर टैक्स और 200 डॉलर खाने और कपड़ो में खर्च हो जाता है. अब उसके पास बचा क्या ? कुछ भी नहीं. और कभी कभी तो उधार लेकर काम चलाना पड़ता है जिससे वो और गरीब हो जाता है.



इसके उलट अमीर एस्सेट्स खरीद कर रखते है. फिर उनके वो एस्सेट्स उन्हें और पैसा कमा कर देते है. उनकी कमाई इसी तरह दो से चार, चार से आठ होती जाती है. अधिकतर अमीर लोग दिमाग से काम लेते है. वे घर लोन पर लेकर उसे किराए पर लगा देते है. बिना मेहनत के हर महीने किराया मिलता है जिससे वे अपना लोन भी चुकता कर लेते है. Maniye ki लोन की इंस्टालमेंट 1 डॉलर है तो ये अपने घर का 2 डॉलर किराया वसूल करेंगे. 1 डॉलर बैंक को देंगे 1 डॉलर अपनी जेब में. तो हो गया ना ये बिना मेहनत के पैसा कमाना.
तो असल में अमीर डैड और गरीब डैड के बीच बस सोच का फासला है. अपना पैसा कैसे खर्चे सिर्फ यही मुद्दे की बात है और कुछ नहीं.


1960 के दिनों में अगर बच्चो से पुछा जाता था कि वे बड़े होकर क्या बनेगे तो सबके पास यही जवाब होता था कि वे अच्छे ग्रेड्स लायेंगे और डॉक्टर बनेंगे. तब सबको यही लगता था कि अच्छे ग्रेड्स लेकर वे बहुत पैसा कमा सकेंगे. हालांकि उनमे से बहुत बच्चे आज बड़े होकर डॉक्टर बन चुके है. बावजूद इसके उनमे से काफी लोग आज भी फैनेंशियेली स्ट्रगल करते नज़र आयेगे. क्योंकि उन्हें हमेशा यही लगा कि ज्यादा पैसा कमाने से उनकी सारी परेशानियां दूर हो जायेंगी. मगर आज के दौर में ऐसा नहीं है. आज बहुत से बच्चे फेमस एथलीट बनना चाह्ते है या फिर सीईओ, या फिर कोई मूवी स्टार या रॉक स्टार. क्योंकि उन्हें पता है कि सिर्फ अच्छी पढ़ाई और अच्छे ग्रेड्स के भरोसे बैठकर वे करियर में सक्सेस नहीं पा सकते. आजकल फैनेंशियेल नाईटमेयर बहुत आम हो गया है. अक्सर नए शादी-शुदा जोड़े ये सोचते है कि उनकी सेलेरी अब डबल हो जायेगी क्योंकि दोनों जने कमा रहे है. एक छोटे से घर में रहते हुए वे अब बड़े घर के सपने देखते है. इसलिए वे पैसा बचाना शुरू कर देते है. इसकी वजह से उनका सारा ध्यान सिर्फ अपना करियर बनाने पर होता है. उनकी कमाई बड़ने लगती है तो ज़ाहिर है उसी हिसाब से खर्चे भी. अब जब आप फैनेंशियेली लिटरेट हुए बिना पैसा बनाते है या बिना सोचे समझे उसे खर्च करते है तो होता ये है कि आप पहले से भी ज्यादा खर्च करने लगते है. ये एक ऐसा चक्कर है जो फिर चलता ही रहता है. नए जोड़े ने अब इतना पैसा कमा लिया कि वे एक बड़ा घर खरीद सके. उन्हें तो यही लगेगा कि वे अब थोड़े अमीर हो गए है. मगर असलियत तो ये है कि बड़े घर के साथ उन्होंने नयी लाएबिलिटीज़ भी खरीद ली है. उनके कैश फ्लो में अब प्रॉपर्टी टैक्स का खर्च बड गया. अब उन्हें एक नयी गाडी भी चाहिए, फर्नीचर भी, सब कुछ नया. उनकी लाएबिलिटीज़ बडती ही चली जा रही है. और ज़्यादातर होता यही है कि इनकम के साथ-साथ खर्चे भी बड़ने लगते है. फिर एक दिन अचानक इस सच्चाई का खुलासा होता है, मगर तब तक हम इस रेट रेस में बुरी तरह फंस चुके होते है.



फिर ऐसे ही लोग हमारे लेखक रोबर्ट के पास आकर पूछते है कि अमीर कैसे बना जाए ? अब यही सवाल तो मुसीबत की जड़ है क्योंकि सबको लगता है कि पैसा ही हर चीज़ का इलाज़ है. ये मानना ही एक बड़ी गलती है. उनकी समस्या ये नहीं है की वे ज्यादा नहीं कमा रहे. बल्कि ये है कि जो कुछ उनके पास है उसे हेंडल कैसे करे. एक कहावत है जो यहाँ पर लागू होती है “ जब तुम खुद को एक गहरे गड्डे में पाओ तो और खोदना छोड़ दो”



क्यों ज़्यादातर लोग पब्लिक स्पीकिंग से घबराते है ? मनोचिकित्सको का मानना है कि लोग इसलिए घबराते है क्योंकि उन्हें रिजेक्शन का डर होता है, औरो से अलग होने का भय होता है. लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे या हम पर कहीं हंस ना दे, यही सोच कर अधिकाँश लोग पब्लिक स्पीकिंग से दूर भागते है. वे वही करना पसंद करते है jo सब कर रहे होते है. वे खुद को भीड़ का हिस्सा बनाकर संतुष्ट हो जाते है. "आपका घर आपका सबसे बड़ा एस्सेट है”,“लोन लीजिए”, अब प्रमोशन हो गया है”, अब सेलेरी बड गयी है तो नया घर लो”,यही सब बाते हम लोगो से सुनते रहते है. और फिर हम भी उसी रास्ते पर चल पड़ते है क्योंकि जो सब कर रहे है वो ज़रूर सही होगा. है कि नहीं ? मगर नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है. अमीर डैड ने कहा था कि जापानीज़ लोग तीन चीजो की ताकत जानते थे. तलवार, कीमती जवाहरात और शीशा. तलवार बाजुओ की ताकत का प्रतीक है, कीमती जवाहरात पैसे की ताकत का और शीशा खुद के अंदर छुपी हुई ताकत को दिखाता है. और वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. जब आप खुद को जानते हो, शीशे के सामने अगर आप खुद से सवाल पूछ सकते हो कि मै सही हूँ या मुझे भी भीड़ का हिस्सा बनकर रहना चाहिए, तो जो जवाब आपको मिलेगा वही आपकी असली ताकत है.


गरीब और मिडल क्लास खुद को पैसे का गुलाम बनने देते है इसीलिए वो कभी अमीर नहीं बन पाते.



16 साल के रोबर्ट और माइक अमीर डैड के साथ हर उस मीटिंग में जाया करते थे जो वे अपने एकाउंटेंट, मेनेजेर्स, इन्वेस्टर और एम्प्लोयियों के साथ रखा करते. यहाँ एक ऐसे अमीर डैड देखने को मिलते है जो पढ़े-लिखे नहीं है, जिन्होंने 13 साल में ही स्कूल छोड़ दिया था मगर आज वो मीटिंग्स रखते है, अपने नीचे काम करने वाले पढ़े-लिखे लोगो को आर्डर देते है, उन्हें बिजनेस के टिप्स समझाते है. एक ऐसा इंसान जो भीड़ का हिस्सा नहीं बना, जिसने रिस्क लिया और जिसने लोगो की परवाह नहीं की. जिसे ये डर नहीं था कि लोग उसके बारे में क्या सोचेंगे ? इन मीटिंग्स का नतीजा ये हुआ कि लेखक और उनका दोस्त दोनों ही स्कूली पढ़ाई में मन नहीं लगा पाए. जब भी उनकी टीचर कोई काम देती थी, उन्हें रूल्स के हिसाब से करना होता था. उन्हें एहसास हुआ कि स्कूली पढ़ाई किस तरह से बच्चो की प्रतिभा को निखरने नहीं देती. उनकी क्रियेटिविटी को मार कर उन्हें एक सांचे में ढाल कर इस समाज का एक मशीनी हिस्सा भर बना देती है. और उन्हें टीचर की इस बात से भी इंकार था कि अच्छे ग्रेड्स लाकर ही सक्सेसफुल और अमीर बना जा सकता है. एक दिन रॉबर्ट की अपने गरीब डैड से बहस हो गयी. उनके पिता का मानना था कि उनका घर उनके लिए सबसे बेस्ट इन्वेस्टमेंट है. मगर वो एक RAT RACE में भाग रहे थे. उनकी इनकम और खर्चे बराबर ही थे. उन्हें पूरा करने के लिए उनके पास एक पल की भी फुर्सत नहीं थी. यही बात रॉबर्ट उन्हें समझाना चाह रहे थे कि उनके पिता के लिए वो घर एस्सेट नहीं लाएबिलिटी है. घर पर उनके पैसे खर्च हो रहे थे बदले में मिल कुछ नहीं रहा था. ये बात उनके गरीब डैड समझ नहीं पा रहे थे और यही फर्क था गरीब और अमर डैड के बीच. खैर, उनकी बहस चलती रही. उन्होंने अपने गरीब पिता को बताया कि अधिकतर लोगो की जिंदगी लोन चुकाने में ही निकल जाती है. जिस घर को वे खरीदते है उसके लिए वे 30 साल तक लोन भरते है. फिर एक और बड़ा घर लेते है और पाना लोन रिन्यू करवाते है. अब घर की कीमत भी उसी हिसाब से बड़ेगी या नहीं ये निर्भर करता है. कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होंने घर खरीदने के लिए एक बड़ी रकम ली थी. जितनी घर की कीमत नहीं थी उससे ज्यादा क़र्ज़ उनके सर पर चढ़ गया. इसका सबसे बड़ा नुकसान लोगो को ये होता है कि वे बाकी जगह इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाते क्योंकि उनका सारा पैसा उस घर पर लगा है. उन्हें कभी इन्वेस्टमेंट करने का मौका ही नहीं मिल पाता और ना ही वे इस बारे में कुछ सीख पाते है. और इस तरह कई एस्सेट्स उनके हाथ से निकल जाते है. अगर इसके बदले लोग सिर्फ एस्सेट्स पर ध्यान दे तो उनका फ्यूचर कहीं ज्यादा बेहतर हो सकता है. 


अब उदाहरण के लिए रॉबर्ट की पत्नी के पेरेंट्स एक बड़े से घर में शिफ्ट हो गए. उनका सोचना था कि अपने लिए बड़ा और नया घर लेना एक सही फैसला है. क्योंकि बाकियों की तरह उन्हें भी घर लेना एक एस्सेट्स लगता था. मगर वे ये जानकर हैरान रह गए कि उस घर का प्रॉपर्टी टैक्स 1000 डॉलर था. ये उनके लिए एक बड़ी कीमत थी. और क्योंकि वे रिटायर हो चुके थे तो इतना पैसा टैक्स के रूप में भरना उनके रिटायर्मेंट बजट के बाहर था. बेशक हम ये नहीं कह रहे कि आप एक नया घर ना ले. बल्कि हम समझाना चाहते है कि जितने पैसे से आप एक बड़ा घर लेंगे उतने पैसे आप किसी एस्सेट में इन्वेस्ट करे तो बेहतर होगा. आपका एस्सेट आपके लिए कमाई करेगा और कुछ ही समय बाद आपके पास इतना पैसा होगा कि आप आसानी से मनपसंद घर ले पायेंगे वो भी बिना किसी लोन के


अमीर और ज्यादा अमीर क्यों होते रहते है, वहीँ मिडल क्लास आगे क्यों नहीं बड पाते, इसके पीछे भी एक वजह है. कारण सीधा है, अमीर एस्सेट खरीदते है जो उनका पैसा दुगना करता रहता है. उस पैसे से उनके सारे खर्चे मजे में निपट जाते है. और मिडल क्लास क्या करते है ? वे तो बस महीने की एक तारीख का इंतज़ार करते है जब उनकी सेलेरी आये. सारी की सारी सेलेरी तो खर्चो को पूरा करने में खत्म हो जाती है तो इन्वेस्टमेंट कहाँ से होगा. और फिर जब सेलेरी बडती है तो उस पर टैक्स भी बड़ जाता है और उसी हिसाब से बाकी खर्चे भी. फिर अंत में वही RAT RACE चलती रहती है.



एक कर्ज में डूबा समाज, जहाँ हम रहते है:


अपने घर को एस्सेट समझना ही वो वजह है जो हमें कर्ज के बोझ तले दबाती है. आज यही अधिकतर लोगो की सोच है. अगर सेलेरी बड़ी है तो लोग सोचते है कि अब वे बड़ा सा घर ले सकते है क्योंकि उन्हें ये अपने पैसे का सही इस्तेमाल लगता है. इसके बदले अगर वही पैसा सही जगह लगाया जाए तो उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है. लेकिन ऐसा हो नहीं pata क्योंकि उनका सारा वक्त हाड़-तोड़ मेहनत करने में चला जाता है. अपनी नौकरी को सेफ ज़ोन समझ कर वे उससे अलग कुछ सोच ही nhi पाते. और साथ ही उनपर कर्ज का इतना बोझ होता है कि वे नौकरी छोड़ने का रिस्क ले ही नहीं सकते. अब ज़रा खुद से ये सवाल कीजिये कि आज आप नौकरी छोड़ कर बैठ जाते है तो कितने दिन आपका गुज़ारा चलेगा ? क्योंकि अगर आप फिनेंशियेली लिटरेट नहीं है, अगर आपने सारी उम्र सिर्फ सेलेरी के भरोसे ही काटी है, और एस्स्ट्स के बदले आपने लाएबिलिटीज़ ली है तो यकीनन आपकी जिंदगी एक कड़ी चुनौती है.




सिर्फ नेट वर्थ के भरोसे आपका काम नहीं चल सकता. नेट वर्थ बताता है कि आपके पास वाकई में कितना पैसा है चाहे वो एक गैराज में पड़ी पुरानी कार के रूप में ही क्यों ना हो. अब भले ही वो कार कुछ काम की नहीं हो. जबकि वेल्थ का मतलब है कि आपके पास जो पैसा है उससे आप कितना और पैसा कमा रहे है. जैसे कि मान लीजिये आपके पास कोई एस्सेट है जिससे हर महीने मुझे 3000 डॉलर की कमाई हो जाती है, और हर महीने आपके 6000 डॉलर खर्चे है तो मै सिर्फ आधे महीने ही अपना गुज़ारा कर पाऊंगा. तो सोल्यूशन ये होगा कि अपने एस्स्ट्स से मिलने वाला पैसा बड़ा दे. जब वो 6000 डॉलर मिलने लगेगा तो आप रातो रात अमीर नहीं हो जायेंगे मगर इस तरह आप वेल्थी होने लगेंगे. अब अगर आप अचानक नौकरी छोड़ते भी है तो आपके एस्सेट्स सारा खर्च कवर कर लेंगे. आप वेल्थी तभी बन पायेंगे जब आपके खर्च आपके एस्सेट्स की ग्रोथ से कम रहे.



Friday, 11 January 2019

7 steps genius ek बनने के लिए

7 steps genius ek बनने के लिए

How to make a genius


हैलो friends Leonardo da Vinci का नाम आप सब ने सुना ही होगा पर  वो आज भी इतने famous क्यों है ये बात ज्यादातर हम asian लोंगो को तो पता नही होगी।

मुझे भी exactly पता नही थी इसलिए पहले तो में आपको बताना चाहूँगा क्यों Leonardo da Vinci को दुनिया में आये सबसे greatest लोगो में से एक माना जाता है और क्यों उन्हें one of the great genius माना जाता है।

Leonardo da Vinci एक inventor थे एक पेंटर
थे एक engineer थे एक writter वो बहुत चीज़ों मे master थे। जितने subject आज एक collage में नही होते उनसे ज्यादा subject के Leonardo da Vinci master थे वो भी उस time पे जब internet नही था जब information मिलना बहुत challanging चीज़ थी|

बस core talent की बात करू तो वो आजतक के सबसे best painter में से जिनकी painting mona lisa की painting सबसे famous painting माना जाता है और उनकी the last supper नाम की painting सबसे ज्यादा re create करी गयी painting है। Leonardo da Vinci की एक sweet सी प्रतिभा की बात करू तो वो एक ambidextrous थे मतलब वो दोनों हाथों से लिख सकते थे और भी ऐसे interesting चीज़े Leonardo da Vinci ने करी थी अपनी life में जिनकी वजह से लोग उन्हें universal genius बोलते थे।

 अब ये सब आपको क्यों बता रहा हूँ क्योंकि आज में आपको जिस book summary देने वाला हु
उसका नाम है- THINK LIKE DA VINCI  जो सच में एक कमाल की book है ।

अपनी intelligence, brain power और knowledge को बढाने के लिये जो मेरे हिसाब से एक बार तो आपको ज़रूर पढ़ना चाहिए।

THINK LIKE DA VINCI book के auther बचपन से दो लोगो के बड़े fan थे। एक superman के और दूसरा Leonardo da Vinci के but बड़े होते होते  auther को पता चला कि superman असली मे नही है वो fake है।
 लेकिन Leonardo da Vinci असली में है और da Vinci की archivement भी real में है ये पता चलने के बाद वो Leonardo da Vinci के और बड़े फैन बन गए। जिसके बाद उन्हें मौका मिला तो उन्होंने कई सालो तक da vinci के बारे में पढाई करी उनकी लिखी हर book को बार-बार
कई बार पढ़ा और बहुत सारी research करी बहुत सारी जगह जाके और finnaly उन्हें सात ऐसी principles मिले जिनको Leonardo da Vinci हमेशा follow करते थे और जिनकी वजह से ही वो इतने बड़े genius बन पाए थे और अगर हम भी इन principales  को follow करे तो हम भी उनकी तरह तो नही but एक genius बन पाए  बस अभी में आपके साथ वही seven principale share करूँगा।

1 CURIOSITY

Auther बोलते है कि da Vinci से ज्यादा curious आदमी शायद ही कभी हुआ होगा वो हद से ज्यादा
curious इंसान थे|
 जिन्हें हर चीज़ के बारे में जानना था वो हमेशा curious और ready रहते थे चीज़े जानने के लिए और यही मेन reason था जिनकी वजह से वो इतना सबकुछ invent और archive कर पाये अब इससे related example  दूँ तो आ दुनिया का सबसे बड़ा hacker वही इंसान बना होगा जिस इंसान के अंदर Hacking ke topic को लेकर सबसे ज्यादा curiosity रही होगी जो hacking से related हर quistion के answer दिनभर search करता था अलग अलग blogs पढ़ता था videos देखता रहता था

वही इंसान आज hacking genius होगा ना कि वो इंसान जिसे में एक बार hacking सिखने का जोश आया था और बस दूसरे दिन चला भी गया था। किसी भी फिल्ड को लेकर जितनी ज्यादा curiosity होगी आपके अंदर उतना ज्यादा chance है कि आप मास्टर बन पाओगे उस फिल्ड में। इसलिए जितना हो सके questions पूछो अपने आप से और उसके answers find out करो।

Business करना है तो उससे related जितने भी ideas,thoughts, questions आते है आपके दिमाग में उसे लिखकर रख लो और उसके answer find out करो एक journal या notebook रखो|

 जिसके अंदर आप ये सब लिख सको। क्योंकि almost सारे genius जो इस दुनिया में आये हैं वो सब अपने journal या special notebook मेंटेन रखते थे जिसमे वो अपनी सीखी गयी बातें लिखते थे thoughts,ideas,plan और बहुत ही specific चीज़े लिखते थे जो उनके goals archive करने में help करता था|

 da Vinci ने भी ऐसी बहुत सी books मेन्टेन रखी थी जो हरदिन लिखा करते थे। और ये चीज़ मैं भी follow करता हूँ इसलिए आप भी एक book या journal मेन्टेन करो जिसमे आपकी भी curiosity level बहुत बढ़ जायेगी और आप genius बनने के first condition को भी पूरा कर लोगे।


2 DEMONSTRATION


Da Vinci जो सीखते थे तो सिर्फ सुनके पड़ के भूल नही जाते थे बल्कि उसे जल्द से जल्द खुद test करने लग जाते थे खुद experience करने लग जाते थे action लेके।

example अभी पिछले point में मैंने बताया हमे notebook या journal मेन्टेन रखना चाहिए क्योंकि ये चीज़ बहुत helpful होगी हमारे goals को archive करने के लिए intelligent   बनने के लिए। आज के word में बताऊ तो physical experience theory से ज्यादा beneficial हो सकते हैं, और जो इंसान ज्यादा practically चीज़े करेगा वही इंसान सबसे ज्यादा genius भी बनेगा

sensations


Da Vinci अपने पांचो सेन्सर का बहुत अच्छे से उसे करते थे और maximum use करते थे। example मतलब समझो कि उनके सामने एक पेड़ है जिसे वो देख रहे है तो उस पेड़ को बस normal पेड़ है लकड़ी पत्ते ऐसे नही देखते थे

बल्कि उसे एकदम गौर से देखते थे कि कैसे उस पेड़ की मोटी-मोटी जड़े हैं जिसके दम पे वो पेड़ खड़ा है कैसा interesting उस पेड़ का शेप है कैसे उनके branches निकले है जो जमीन से थोड़ी height पे हैं मतलब वो चीज़ों को एकदम detail में देखते थे और यही reason भी था जिनसे वो चीज़ों को इतने अच्छे से समझ पाते थे इसलिए आप भी अपने sensors का एकदम अच्छे से use करो|

4 comfort with paradox

ये मेरा favorite principle है जिसे आप जरा गौर से समझना एक example देके बताता हूँ मैं एक आदमी को बोलता हूं कि किसी भी इंसान को जान से मारना गलत बात है|

 और वो नही करना चाहिए जबकि दूसरी तरफ मै और एक इंसान से बोलता हूँ कि इंसान की जान लेना सही है और वो लेनी चाहिए अब ये मेरी दोंनो बातो को कोई तीसरा आदमी सुन रहा होगा जो normal mentality वाला होगा वो फ़ौरन मुझे judge करने लगेगा और बोलेगा ये आदमी तो काफी गलत बाते करता है बल्कि ये बाते normal नही एक genius mentality वाला सुनता तो वो मुझे फ़ौरन गलत मानने का डिसीजन नही लेता बल्कि वो दोनों बातो को समझने की कोशिश करता और अगर समझ नही आता तो वो मुझसे पूछता कि मैने ऐसा क्यों बोला।

जिससे शायद उसे ये सच पता चल पाता पहले मैं जिस आदमी से बात कर रहा था वो एक ख़राब criminal type इंसान था जो शायद आम लोगो को मार सकता है future में जबकि दूसरी तरफ वो दूसरा इंसान एक soldier या police officer था जिससे में ये discuss कर रहा था कि जो terriost, criminal murderers होते है उन्हें जान से मार देने की सज़ा सही मिसाल हो सकती है

 लोगो के लिए तो ये पता चलने के बाद उस genius mentality वाले को
कि मैं एकदम opposite चीज़ बोल रहा था जो दोनों बातें एकदम सही भी थी अपने जगह पे जो वो normal mentality वाला इंसान नही समझ पाया। ज्यादातर लोगो को मै अगर दो बात बोलू जो उनके हिसाब से opposite हो रही है तो वो मेरी दोनों बातें सुनकर confuse हो जाएंगे और मुझे गलत बोलके एक option choose करेंगे जो उनके हिसाब से सही होगा। लेकिन genius लोग ऐसे नही होते वो दो opposite लग रही बातो को समझने की कोशिश करते है और जल्दी डिसीजन नही लेते और ज्यादा information search करने की कोशिश करते है।

Conclude  करने के लिये बोलू तो ये principle step 4 को apply करने के लिए क्या कर सकते हो कि जितना हो सके उतना फ़ौरन डिसीजन मत लो बल्कि चीज़ों को अलग अलग तरीके से समझो ऐसा करने से आपको दुनिया की better understanding होगी आपकी knowledge और wisdom भी बहुत बढ़ जायेगी एक normal इंसान से। ये थे सात में से important principle बाकी बचे 3 principle next post में cover करूँगा।

Friday, 4 January 2019

Xiaomi के बारे में 8 रोचक तथ्य जो आप शायद नहीं जानते होंगे interesting facts in hindi

Xiaomi के बारे में 8 रोच तथ्य जो आप शायद नहीं जानते होंगे|interesting facts about xiaomi


interesting facts
Xiaomi


#Name


Xiaomi का शाब्दिक अर्थ है बाजरा और चावल, जो वास्तव में एक बौद्ध अवधारणा का संदर्भ है। यह दर्शाता है कि Xiaomi शीर्ष के लिए लक्ष्य करने से पहले छोटी चीजों से शुरुआत करना चाहता है

Mi” मिशन इंपॉसिबल (मूवी नहीं!) के लिए एक संक्षिप्त रूप है जो असंभव बाधाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए है जो उन्होंने दूर की है।
interesting facts

Wednesday, 2 January 2019

School आपके टैलेंट को छुपा रहा है -natural talent



natural talent


China में एक छोटा सा गांव है जिसका नाम है "Atule'er"  वहां के सामान्य बच्चे बांस के बने सीढ़ी पर 800 मीटर daily चढ़कर school जाते हैं और उस बांस का सीढ़ी पहाड़ के एकदम side में रहता है।
natural talent
 जो कभी भी टूट सकता है daily जान जोखिम वाली मेहनत सिर्फ स्कूल जाने के लिए ये सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां सिर्फ एक ही school है।

 कोई road नही होने के वजह से उन मासूम बच्चो को सीढ़ी से जाना पड़ता है। मुझे नही लगता कि आपको स्कूल जाने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती होगी। जो पढ़ाई आपको school में मिलती है वो actually टूटी हुई है। 

class का मतलब सिर्फ रटो टेस्ट दो पास हो फिर उसी चीज़ को repeat करो। पूरी दुनिया इतने सालों में इतनी बदल चुकी है कि बुजुर्ग लोग सोचते हैं कि मैं कोई अलग दुनिया में आ गया हूं। लेकिन हमारा ये education system सालो पहले जैसा था creativity हमारे देश में मर रही है।

School की ideology क्या होती है "Time पर school जाओ bell बजेगी तो एक काम करो दूसरा bell बजेगा तो उसे follow करो यही robotics सिस्टम को follow करो।

 यदि आप maths,science या किसी दूसरे subject में ख़राब हो तो exam के time बवाल खड़ा हो जाता है। आपके पेरेंट्स को हमेशा आपके ख़राब marks के बारे मे complaint मिलता है यदि आप drawing, Dance, cricket, Youtube, Blogging, या   कोई other sport या music मे बहुत अच्छे हो तो आपके पैरेंट्स को कोई भी चिंता नही होगी और वो ज्यादातर इन चीज़ों पर ध्यान भी नही देते होंगे और बोलेंगे पढ़ाई पर ध्यान दो।

 ये सब भी आपके लिए बहुत बड़ा कैरियर option बन सकता है पर हमको इन पर ध्यान देने को नही कहता। simple सी बात बताऊ तो school आपके talent का value नही करता है और ये educational सिस्टम इस बात को नही मानता है कि सब के अंदर कुछ न कुछ अलग talent होता है जैसे की मेरा कहना है कि एक ऐसा काम ज़रूर है जो आपसे बेहतर और कोई नही कर सकता जो की है आपका talent। 

कई student के अंदर कुछ अलग different टैलेंट होता है पर कुछ student acedmic मे भी अच्छे होते है मतलब जिन्हें पढाई बहुत पसन्द होती है उनके लिए तो school एकदम सही है

 लेकिन उनका क्या जिनके अंदर कुछ unique अलग टैलेंट है जो अलग करना चाहते हैं। 
natural talent

Albert Einstein ने कहा था- *Everyone is a genius, but if you judge a fish by it's ability to climb a tree, whole life believing that it is stupid.*  अगर आप मछली को देखो की वो पेड़ पर चढ़ सकती है या नही तो फिर कैसे काम चलेगा की अगर वो नही चढ़ पायी तो आप कहोगे ये मछली stupid है पर ऐसा थोड़ी न होता है, मछली अगर पानी के अंदर तैर सकती है तो उसका टैलेंट तो तैरना हुआ तो वो देखो न उसको पेड़ पर चढ़ने के लिए क्यों बोल रहे हो। 

ऐसा ही आपके साथ होता होगा आपको school में एक normal स्टूडेंट बोला जाता होगा और शायद कभी-कभी stupid भी बोला जा सकता है उन techers और बाकी लोगों को आपके तैरने(talent) के बारे में पता ही नही और स्कूल basicaly यही करता है talent को मारो और एक set की हुई सिस्टम में student को डालो उनके ऊपर एक डिग्री का ठप्पा लगाओ और आगे बढ़ो। 

और इसमें करोड़ो का फायदा हो रहा है इन educational institution का मै ऐसा नही कह रहा की सारे educational institution ख़राब है पर ज्यादातर educational institution सिर्फ profit के लिए आते हैं उनको बच्चो की future से का कोई मतलब नही होता। 

poster में तो लगा देंगे एक लड़की को और एक book लेकर खड़ी हुई होगी और नीचे कुछ ऐसा लिखा हुआ होगा-- your dream to success या your dreams coming true.

ह्यूमन ब्रेन यानि इंसानी दिमाग में जो learnig की capibilty बहुत ज्यादा होती है और किसी के लिए भी कुछ सीखना एकदम possible है पर असल बात ये है कि school सिस्टम हमें ये करने से रोकता है। मैं आज आराम से ये public में कह सकता हु कि मैंने जितना internet से 3 महीने में सिखा है|

natural talent

 उतना मैंने अपने school लाइफ के 12 साल में नही सीख पाया और internet एक ऐसी दुनिया है जहाँ से आप जो चाहे वो घर बैठे सीख सकते हो और जिस तरह internet india में इतनी सस्ती हो गयी है ये आपके लिए वरदान से कम नही है internet से आप बहुत जगहों से सीख सकते हो लेकिन मैं 

आपको internet से अच्छी से सीखने के लिए skillshare.com वेबसाइट का advice दूंगा क्योंकि मुझे skillshare से काफी अच्छा result मिल रहा है।skillshare में आपको  पैसे देंने होंगे यदि आप free में सीखना चाहते है तो youtube भी बहुत अच्छा platform है यहाँ से आप कुछ भी online सिख सकते है सिस्टम की educational सिस्टम  ऐसा बना हुआ है कि school में बच्चो को information दिया जाता है 

School में  बच्चे  information को अपनी खोपड़ी में भेजते हैं बाद में उनकी test ली जाती है ये चेक करने के लिए पढ़ा हुआ उनके दिमाग में है कि नही। यहाँ पर सबसे असल बात ये है कि exam मतलब हो गया है recalling power मतलब आप कितना याद रख सकते हो। exam के पहले आप उसी information को बार बार पढ़ोगे और exam में जाकर लिख दोगे पर exam के बाद क्या होता है 

आप भूल जाते हो बहुत सारे studies और सर्वे में ये पता चला है कि जिस चीज़ को आप रटते हो और exam में लिखते हो तो exam ख़तम होने के बस तीन दिन बाद ही आप उस information का 95℅ भूल चुके होते हो। इसका मतलब ये हुआ आपके test का marks चाहे आपका कितना भी marks आये ये बताता है कि आपके रटने की कितनी है। 

जो कि एक fake ecompliments है और इसी fake ecompliments के घमण्ड में toppers मुँह ऊँचा करके चलते हैं toppers को ये लगता है कि मेरी intelligence  कितनी ज्यादा है पर सिर्फ memory power ही तो ज्यादा होती है again सारे toppers ऐसे नही होते लेकिन ज्यादातर toppers ऐसे ही होते हैं आप ही बोलो क्या रटना actual talent और actual intelligence को बताता है। 

आपकी memory power कितनी है ये अलग चीज़ है आपके अंदर intelligence कितनी है ये दूसरी चीज़ है। आपको memory power से ज्यादा आपकी intelligence  और awareness को बढ़ाने की ज़रूरत है।

 वही आपको बाद में काम देगी ताकि आप अपनी बुद्धि की help से इस दुनिया को समझ सको कि दुनिया क्या है फिर अपनी बुद्धि से कुछ ऐसा कर सको कि जिसको करने के बाद आपको लगे कि मैंने कुछ किया ज़िन्दगी में school के सिस्टम में आप information को रटते हो ये तो कोई भी कर सकता है लेकिन में आपसे ये फिर से कह रहा हूं कि एक ऐसी चीज़ ज़रूर है आपके class या आपके school में या आपके शहर में आपसे अच्छा और कोई नही कर सकता। school में teachers को बच्चो को रटने के बदले उनकी curiosity बढ़ाना चाहिए।

 curiosity मतलब हर चीज़ को जानने की इच्छा  आपके अंदर किसी चीज़ को जानने की इच्छा पहले से ही पर school उसे और बढ़ावा नही देता जो कि उसे देना चाहिए। ये जो मैंने बातो को आपको बताया ये शायद सबको पता है और हर student के मन में सिस्टम के खिलाफ जरूर सवाल उठा होगा पर पब्लिक में इसके बारे में बात ही नही करता "जैसा चल रहा है वैसा चलने दो"! School सिस्टम से अलग आपको कुछ अलग करने का मन है आपका कुछ अलग शौक है अगर आप उसे follow करते हो जब आप उस काम को कर रहे होते हो तब आप खोये हुए होते हो तो उस time आपका brain एक ऐसे स्थिति मे होता है जिसमे real learnig होती है असल में बच्चा कुछ सीखता है

 जब आप किसी काम में खो जाते हो तो आप खुश होते हो इसलिए उस समय जो आपके दिमाग में जाता है उसे आप तीन दिन के बाद नही भूलते बल्कि हमेशा याद रखते हो। दुनिया के जितने भी बड़े thinkers हैं सबसे successful लोग हैं जितने भी बड़े leaders हैं उन सब में एक चीज़ common है वो उनके school या collage के dropouts थे।
 Mark Zuckerberg, Steve Jobs, Richard Branson, bill gates, Robert Downey, Jr.,johnny depp,Daniel Radcliffe ये लिस्ट असल में इतनी बड़ी है अगर मैं नाम बताते जाऊ तो ये post नाम मे ही भर जाएगा।

 ये सारे लोग अपने school collage से dropouts कर लिए  थे यानि school को छोड़कर अपनी जो इच्छा है वो किये थे। नही नही मै आपको ये नही कह रहा हूँ कि आप भी school छोड़ दो बिल्कुल नही यार बल्कि में इनकी सोच आपको बता रहा हूँ। जिससे आप कुछ सिख पाओ इनकी सोच देखो उन्होंने अपना talent को चुना और एक चीज़ पर focus किया जिस पर इनका इंटरेस्ट था। आप ही सोचो अगर इनके passion को school में support किया जाता तो वो कभी school नही छोड़ते। इन लोगो को वही feeling आयी जो आप में से ज्यादातर student के मन में आती है ये feeling कि school हमारी इच्छाओ को follow करने नही दे रहा है हमे रोक रहा है। 

इनकी ज़िन्दगी में ऐसी परिस्थिति हुई कि इन्होंने अपने school collage से किसी भी तरह dropout किया और अपने passion को follow किया और आज successful है पर आज दुनिया में लाखों students हैं जो कि लाचार हैं और उन्हें इसी लाचारी में school के सिस्टम को follow करना पड़ रहा है और अपने passion को छोड़ना पड़ रहा है। मेरे इस post का मतलब एक ही है कि जो students इस systum में फसे हुए है वो aware हों अगर थोड़ी सी भी कुछ करने की इच्छा है तो उसे चुनों gaming में करियर बनाना है तो रुके क्यों हो 

video editing सीखना है तो tutorials देखो coding सीखो और game playstore में डालो blogging करना है तो seo सीखो पोस्ट लिखो रुके क्यों हो| अगर पढ़ने का मन है तो पढ़ो यार मैं ये नही कह रहा हु कि पढ़ाई ख़राब चीज़ है सबका दिमाग अलग अलग होता है अगर आपको पढ़ने में मन लगता है तो कौन रोक रहा है। 

memory power strong है तो इस सिस्टम में भी आप बहुत कुछ कर सकते हो और कुछ बड़ा कर जाओ अगर आप उन लोगो में से हो जिनको पढ़ने में एकदम मन नही लग रहा तो time waste क्यों । दोस्तों ज़िन्दगी जो करना चाहते हो एक बार जरूर करो जो होगा देखा जायेगा। सुनो सबकी करो दिल की। 
 credit goes to factechz

Reference


natural talent

Sunday, 30 December 2018

Bhairopur school- बहुत ही सुंदर स्कूल

Bhairopur school-


बेहतरीन विद्यालयों में से एक भैरोपुर का school। जहाँ पर अनेक प्रकार के फुल बहुुुत ही सुन्दर पौधे लगाये गये हैं। इस school में पढ़ाई बहुत ही अच्छी होती है।
बहुत ही सुंदर school

Some photos

#1
















                     
      
                                   - DHEERAJ NAYAK
                       

Tuesday, 18 December 2018

Know more about whatsapp GB For android

Know more about whatsapp GB

Whatsapp GB

Hello friends, welcome to everyone in kcreations.tk Today, we bring you an application as an application which you are likely to get many benefits by reading. Whatsapp GB

You may have found out about a portion of the GB WhatsApp App, or you may have utilized some WhatsApp Messenger around you. Whatsapp GB

The full name of this app is GB Whatsapp, and it is not exactly like your previous whatsapp. In this, some functions are like the first WhatsApp, but with the GB WhatsApp App change we have come across people. We should welcome the GB Whatsapp app. Whatsapp GB



GB WhatsApp Features


How to download GB WhatsApp? Before knowing this, we tell you this Some feature, which is as : -

  • Without a whopping week, you can stay open online for free. That means, staying online for 24 hours can show others how much you drive WhatsApp.
  • Yo can hide your online WHATSAP status.
  • The ability to recall and erase the message sent by the app is in it.
  • You can keep your status safe.The GBWhatsApp can change the icon as you wish.
  • At WhatsApp, you cannot send more than 20 MB of VIDEO, PDF files, but on GB WhatsApp you can send up to 30 MB of VIDEO, PDF file.
  • On WhatsAp, you can send up to 10 photos at a time, but you can send up to 90 photos at one time on the GB WhatsApp apk.
  • Voices Calling and VIDEO Calling can be done at GB Whatsapp.
  • You will have to set what is to send.
We have given you GB WhatsApp Trick in Hindi / Features, and now you should have understood better about how to run GB Whatsapp.


So, let us now call you GB WhatsApp Download Karna. First of all, take damage.


Loss of GB Whatsapp



Such things are their own advantages and losses, but you have to understand them. If you run the GB WhatsAap all day long, then leaving everything else is wrong.

Whatsapp GB

Things like GB Whatsapp is meant to help only people, our work is easy to do, and not to waste our time. You have to understand this.


Download the app and earn unlimited Recharge

Refer code:- 23N967H6